क्षतिग्रस्त या अक्षतिग्रस्त पाण्डुलिपि अथवा पाण्डुलिपियों के संग्रह के संबंध में उनकी मियाद बढ़ाने के लिए कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कार्यवाही, संरक्षण है। यह निवारक या उपचारात्मक हो सकता है।

      निवारक संरक्षण भविष्य में नष्ट होने के जोखिम को कम करता है। इसमें पाण्डुलिपियों के संग्रह क्षेत्र के तापमान और आर्द्रता को नियंत्रित करने और पाण्डुलिपि / संग्रह की स्थिति के नियमित निरीक्षण जैसे उपायों को शामिल किया गया है।

      सक्रिय क्षय को रोकने के लिए पाण्डुलिपि (पाण्डुलिपियों) पर कोई भी प्रत्यक्ष कार्यवाही उपचारात्मक संरक्षण है। उदाहरण के लिए, कीड़े से ग्रस्त पाण्डुलिपि का धूम्रीकरण (फ्यूमीगेशन)।

      पाण्डुलिपियों का कभी-कभी पुनरुद्धार कार्य किया जाता है। यह संरक्षण से अलग है क्योंकि पहले के कार्यों का उद्देश्य पाण्डुलिपि को उसके मूल रूप में जितना संभव हो उतना बनाए रखना है। यह मुख्य रूप से उनकी दिखावट को बढ़ाने के लिए है। इसमें चित्रों को पुनर्निमित करने और पन्नों से पेंसिल चिह्नों को हटाने जैसे उपाय शामिल हो सकते हैं।